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आरोग्य

नीम एक बहुत उपयोगी वृक्ष है । इसकी जड़ से लेकर फूल-पत्ती-कोंपल, फल तक सभी अवयव औषधीय गुणों से भरे-पूरे है। भारतवर्ष के गरीब लोगो के लिए यह एक प्रकार से कल्पवृक्ष है। चैत्र मास में नीम की नई कोपंलो को दस-पंद्रह दिन तक नित्य प्रात:काल चबाकर खाने से रक्त शुद्ध होता है। फोड़े-फुंसी नही निकलते और मलेरिया ज्वर नही आता। नीम की पत्तियों का रस दो चम्मच शहद में मिलाकर प्रात: काल पीने से पीलिया रोग में लाभ होता है।

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आयुर्वेद में रोग के निदान के लिए `माधव निदान´ श्रेष्ठ ग्रंथ माना गया है। इस ग्रंथ में वात, पित्त, कफ किन कारणों से बढ़ते हैं, इस पर तीन श्लोक लिखे है । `क्रोधात्´ शब्द लिखकर स्पष्ट बतलाया है कि क्रोध से पित्त बढता है। आज का मनुष्य बात-बात पर गुस्सा हो जाता है, तनावग्रस्त हो अंदर ही अंदर रूठी स्थिति में घुटता रहता है। उससे पित्त की वृद्धि होती है। अधिकांश बिना निदान (डायग्नोसिस) किए हुए पेट के दरदों में इस पित्त का बढना एवं क्रोध ही मूल कारण होता है, जबकि चिकित्सक दवा पर दवा लिखते जाते है । पित्तशमन की औषधियां भी काम नहीं करेंगी। मात्र क्रोध पर नियंत्रण एवं प्रसन्न मन:स्थिति ही किसी तकलीफ को दूर कर सकती है।

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गेहूँ के आटे को छानकर जो चोकर अलग किया जाता है, वह कितना गुणकारी है, यह जानना जरूरी है। यह कब्ज की अद्वितीय प्राकृतिक औषधि है। यह आँतों में उत्तेजना पैदा नही करता तथा कैन्सर से दूर रखता है ( यह प्रयोग द्वारा प्रमाणित हो गया है।) अमाशय के घाव (पेप्टिक अल्सर),आँतों के विभिन्न रोग, उच्च कोलेस्टेरॉल से भी यह बचाता है। चोकर खाने वालों को कभी पाइल्स, भगंदर या मलाशय का कैन्सर नही होता है। मोटापा घटाने के लिए चोकर एक नीरापद औषधि है। मधुमेह निवारण में भी चोकर मदद करता है। चोकर मिश्रित आटा रोटी को और भी स्वादिष्ट बना देता है । गेहूं का चोकर एक आदर्श रेशा (फाइबर डाइट) है। हम आज कि जीवन शैली में मैदे वाली रोटी खाते हैं एवं चोकर के इतने लाभों को पाने से बचे रहते है। 

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