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वेदों में सूर्यकिरण चिकित्सा का विवरण बड़े विस्तार से आता है। मत्स्यपुराण कहता हैं कि नीरोगिता की इच्छा हैं तो सूर्य की शरण में जाओ। वेदों में उदित होते सूर्य की किरणों का बड़ा महत्व बताया गया है। अथर्ववेद 17/1/30 में वर्णन आया हैं कि उदित होता सूर्य मृत्यु के सभी कारणों, सभी रोगों को नष्ट कर देता है। इस समय की इन्फ्रारेड किरणों में प्रचुर जीवनीशक्ति होती है। ऋग्वेद 1/50/11 में उल्लेख हैं कि रक्ताल्पता की सर्वश्रेष्ठ औषधि हैं उदित होते सूर्य के दर्शन, ध्यान। हृदय की सभी बीमारियाँ नित्य उगते सूर्य के दर्शन, ध्यान एवं अर्घ से दूर हो सकती है। (अथर्व.1/22/1)

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