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सुकरात शिष्यों को पढ़ा रहे थे। पत्नी ने आवाज दी- भोजन तैयार हैं, खा लो। सुकरात तो पढ़ाने में मग्न थे। फिर जोर से आवाज आई- खाना खालो। सुकरात ने कहा- आ रहा हूँ। थोड़ी देर बाद भी सुकरात नही पहुँचे तो पत्नी क्रोधित हो गई। इस बार उसने गुस्से में लाल होकर कहा- जल्दी आ जाओ और खाना खा लो। शिष्य समझ गए, उन्होंने कहा- गुरूदेव चले जाइए, पर सुकरात तो पढ़ाने में मस्त थे। पत्नी का पारा चढ़ गया, उसने उठाया पानी का मटका और सुकरात के माथे पर उँडेल दिया। सभी शिष्य भौचक्के रह गए। मुस्कुराते हुए सुकरात ने कहा- देखो, मेरी पत्नी कितनी अच्छी हैं, यह पहले तो गरजती हैं फिर बरसती भी हैं। 


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3 Responses to सुकरात

  • Sanvee says:

    That’s what we’ve all been waiting for! Great ptsoing!

  • Susi says:

    Free info like this is an apple from the tree of knwloegde. Sinful?

  • AMAR says:

    HAM GURUDEV KE BACCHE NAVYUG JAROOR LAYENGE…………….
    NAVYUG KA ADHAR SIRF PAVITRTA NAIRDOSHTA BRAMHCHARY JESE GUN HI HAIN
    JINKA HAM CHARO OR PRADARSHAN KAR RAHR HAIN
    SHABASH MERE PYARE BHAIYO OR BEHNO….
    DAILY SATSAHITYA PADHA KARIYE …PLS

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