m-150x150

yugnirman.org

ब्लॉग आर्काइव
Donate blood save lives
blood
Our visiters
  • 1389Total visitors:
  • 12Visitors today:
  • 1Visitors currently online:
यज्ञ रूप प्रभो हमारे भाव उज्ज्वल कीजिए । 
छोड़ देवें छल, कपट को,मानसिक बल दीजिए॥ 

वेद की बोले ऋचाएँ, सत्य को धारण करें । 
हर्ष में हो मग्न सारे ,शोक सागर से तरें॥ 

अश्वमेधादिक रचाएँ, यज्ञ पर उपकार को । 
धर्म मर्यादा चलाकर, लाभ दें संसार को॥ 

नित्य श्रद्घा भक्ति से, यज्ञादि हम करते रहें 
रोग-पीड़ित विश्व के,संताप सब हरते रहें॥ 

कामना मिट जाए मन से, पाप अत्याचार की । 
भावनाएँ शुद्घ होवें, यज्ञ से नर- नारि की॥ 

लाभकारी हो हवन, हर जीवधारी के लिए । 
वायु, जल सर्वत्र हों, शुभ गंध को धारण किए॥ 

स्वार्थ भाव मिटे हमारा, प्रेम-पथ विस्तार हो । 
इदं न मम् का सार्थक, प्रत्येक में व्यवहार हो॥ 

हाथ जोड़ झुकाये मस्तक वंदना हम कर रहे । 
नाथ करूणा रूप करूणा, आपकी सब पर रहे॥ 

यज्ञ रूप प्रभो हमारे भाव उज्ज्वल कीजिए॥ 

PLEASE SHARE THIS POSTShare on Facebook
0Tweet about this on TwitterEmail this to someoneShare on Google+0Pin on Pinterest0

3 Responses to यज्ञ महिमा

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *