m-150x150

yugnirman.org

ब्लॉग आर्काइव
Donate blood save lives
blood
Our visiters
  • 1388Total visitors:
  • 11Visitors today:
  • 0Visitors currently online:
1) लुकमान से किसी ने पूछा-आपने ऐसी तमीज किस से सीखी, उन्होने जवाब दिया बदतमीजो से। वे जो करते हैं, भोगते है उसका मैने ध्यान रखा और अपनी आदतो को उस कसौटी पर कस कर सही किया ।
—————-
2) प्यार से बच्चे खुश, 
आदर से बड़े खुश, 
दया से पशु खुश, 
रक्तदान से प्रभु खुश।
—————-
3) कर्मनिष्ठ अपनी श्रद्धा और निष्ठा की प्रबलता को लेकर आगे बढ़ते है।
—————-
4) मनोबल के बने रहने से मनुष्य में प्रसन्नता, विश्वास और उत्साह बना रहता है।
—————-
5) तीर्थो में सबसे श्रेष्ठ तीर्थ हैं – ‘‘अन्तःकरण की पवित्रता’’
—————-
6) जिनने भगवान की इच्छा के अनुरूप स्वयं को ढालने की कोशिश की, वे भगवान के कृपापात्र बन गये।
—————-
7) बच्चों पर निवेश करने की सबसे अच्छी चीज हैं अपना समय और अच्छे संस्कार। ध्यान रखें, एक श्रेष्ठ बालक का निर्माण सौ विद्यालय को बनाने से भी बेहतर है।
—————-
8) आप जीवन में कितने भी ऊँचे क्यों न उठ जाएँ पर अपनी गरीबी और कठिनाई के दिन कभी मत भूलिए।
—————-
9) मानवता की सेवा करने वाले हाथ उतने ही धन्य होते हैं जितने परमात्मा की प्रार्थना करने वाले ओंठ।
—————-
10) धीरज मत खोओ। हीनता और हताशा तुम्हें शोभा नहीं देती। अपने आत्म-विश्वास को बढ़ाओ, फिर से प्रयास करो, तुम्हें सफलता अवश्य मिलेगी।
—————-
11) बाधाओं को देखकर विचलित न हो। विश्वास रखें, जीवन में निन्यानवें द्वार बंद जो जाते है।, तब भी कोई-न-कोई एक द्वारा जरूर खुला रहता है।
—————-
12) जब आप किसी को भौतिक पदार्थ देने में असमर्थ हो, तो भी अपनी सद्भावनायें और शुभकामनायें दूसरो को देते रहिए।
—————-
13) सावधान ! पर भर का क्रोध आपका पूरा भविष्य बिगाड़ सकता है।
—————-
14) धन और व्यवसाय में इतने भी व्यस्त मत बनियें कि स्वास्थ्य, परिवार और अपने कर्तव्यों पर ध्यान न दे पाएँ।
—————-
15) मुस्कराने से आधे दुःख दूर हो जाते है।
—————-
16) संसार में न कोई तुम्हारा मित्र है और न शत्रु। तुम्हारे अपने विचार ही शत्रु और मित्र बनाने के लिए उत्तरदायी है।
—————-
17) जैसे व्यवहार की तुम दूसरों से अपेक्षा रखते हो, वैसा ही व्यवहार तुम दूसरों के प्रति करो। 
—————-
18) बहुत से काम खराब ढंग से करने की बजाय, थोड़े काम अच्छे ढंग से करना बेहतर है।
—————-
19) आत्म-विश्वास से बढ़कर न कोई मित्र हैं, न प्रगति की कोई सीढ़ी। आप इस मित्र को सदा अपने साथ रखिए। यह आपको पर्याप्त सम्बल देगा।
—————-
20) मान-सन्मान सदा औरो को देने के लिए होता हैं, औरों से लेने के लिए नही।
—————-
21) हमें जो मिला हैं, हमारे भाग्य से ज्यादा मिला है। यदि आपके पाँव में जूते नहीं हैं, तो अफसोस मत कीजिये। दुनिया में कई लोगों के पास तो पाँव ही नहीं है।
—————-
22) किसी शान्त और विनम्र व्यक्ति से अपनी तुलना करके देखिए, आपको लगेगा कि, आपका घमण्ड निश्यच ही त्यागने जैसा है।
—————-
23) पीडि़त से यह मत पूछिये कि तुम्हार दर्द कैसा है। उसकी पीड़ा को स्वयं में देखिए और फिर आप वह सब कीजिए जो आप अपनी ओर से कर सकते है।
—————-
24) जो दुःख आने से पहले ही दुःख मानता हैं, वह आवश्यकता से ज्यादा दुःख उठाता है।
—————-

PLEASE SHARE THIS POSTShare on Facebook0Tweet about this on TwitterEmail this to someoneShare on Google+0Pin on Pinterest0

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *