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1) अन्तर्मन के चक्षु बाह्य नेत्रों से भी अधिक प्रबल है।
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2) अनजान होना इतनी लज्जा की बात नहीं, जितना सीखने के लिए तैयार न होना।

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3) अगर संकेत मिल जाए तो बस बड़ा कदम उठाने से घबराये नहीं, क्योंकि आप एक चैड़ी खाई को दो छोटी छलांगो में पार नहीं कर सकते।

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4) अगर आप अपने दिमाग को इन तीन बातों -काम करने, बचत करने और सीखने के लिये तैयार कर लेते हैं तो आप उन्नति कर सकते है।

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5) गायत्री साधना मात्र जीभ से मंत्रोच्चारण करने से नहीं, महानता के आदर्शो को जीवन-यात्रा का एक अंग बनाने पर सम्पन्न होती हैं। इसके लिए जहा व्यक्ति का चिन्तन सही रखने के लिए आहार सही होना जरुरी हैं, वहीं श्रेष्ठ विचारों को आमन्त्रित करने की कला भी उसे सीखनी होगी, तभी ध्यान सफल होगा।

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6) अगर आपको किसी की हॅंसी निर्मल लगती हैं तो जान लीजिये वह आदमी भी निश्छल है।

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7) अगर आपके पाँव में जूते नहीं हैं तो अफसोस न करे ऐसे भी लोग हैं जिनके पाँव ही नहीं है।

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8) अगर आपने हवा में महल बनाया हैं तो कोई खराब काम नहीं किया। पर अब उसके नीचे नींव बनाइये।

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9) अल्प ज्ञान वाला महान् अहंकारी होता है।

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10) अल्पमत कभी-कभी और बहुमत अनेक बार गलत साबित हुआ है।

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11) अल्पभाषी सर्वोत्तम मानव है।

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12) गंभीरतापूर्वक विचार किया जाये तो प्रतीत होगा कि जीवन और जगत् में विद्यमान समस्त दुःखों के कारण तीन हैं – 1. अज्ञान 2 अशक्ति 3. अभाव। जो इन तीन कारणों को जिस सीमा तक अपने से दूर करने में समर्थ होगा, वह उतना ही सुखी बन सकेगा।

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13) गांधी जी, डा.प्रफूल्ल चन्द्र राय से – विदेशी ढंग से कपडे पहनकर सही ढंग से राष्ट्रसेवा नहीं की जा सकती। राष्ट्रीय मूल्य, राष्ट्रीय भावनाए एवं राष्ट्रीय संस्कृति, इन सबकी एक ही पहचान हैं, अपना राष्ट्रीय वेश-विन्यास।

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14) गहरे दुःख से वाणी मूक हो जाती है।

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15) गभ्मीरता सज्जनो का पहला लक्षण है।

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16) गीता का पठन-मनन करने वाला प्रत्येक प्रश्न का उत्तर दे सकता हैं । प्रतिदिन गीता का पाठ, विचार करना शुरु कर दें। गीता के अनुसार अपनी व्यवहार करें, जीवन बनायें तो दुःख, सन्ताप, हलचल सब मिट जायेगी।

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17) गीता ने कामना के त्याग पर विशेष जोर दिया हैं। ऐसा होना चाहिये, ऐसा नहीं होना चाहिये-यह कामना हैं। शान्ति स्वतःसिद्ध हैं। अशान्ति कामना से ही होती हैं।

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18) गरीब बच्चों को मिठाई खिलाओ तो शोक-चिन्ता मिट जायेंगे।

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19) गरीब वह नही, जिसके पास कम हैं, बल्कि वह हैं, जो अधिक चाहता है।

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20) गाय को सहलाने से, उसकी पीठ आदि पर हाथ फेरने से गाय प्रसन्न होती हैं। गाय के प्रसन्न होने पर साधारण रोगो की तो बात ही क्या हैं, बडे-बडे असाध्य रोग भी मिट सकते है। लगभग बारह महिने तक कर के देखना चाहिये।

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21) गाय के गोबर में लक्ष्मी का और गोमूत्र में गंगा का निवास माना गया है।

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22) लाठी व पत्थरों से तो प्रायः हड्डिया ही टूटती हैं, परन्तु शब्दों से प्रायः संबंध टूट जाते है।

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23) लोभ नहीं हो तो रुपया सुख नहीं दे सकता है।

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24) लोग प्यार करना सीखे। हममें, अपने आप में, अपनी आत्मा और जीवन में , परिवार में, समाज में, कर्तव्य में और ईश्वर में दसों दिशाओं में प्रेम बिखेरना और उसकी लौटती हुयी प्रतिध्वनि का भाव भरा अमृत पीकर धन्य हो जाना, यही जीवन की सफलता है।

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